अहंकार ----------विवेक को खा जाता है !!
चिंता ------------आयु को खा जाता है !!
क्रोध --------------ज्ञान को खा जाता है !!
लोभ ------------- ईमान को खा जाता है !!
प्रायश्चित --------पाप को खा जाता है !!
रिशवत ---------न्याय को खा जाती है !!
पाप ------------मानवता को खा जाता है !!
घमंड -----------भविष्य को अन्धकार बना देती है !!
याचना ---------स्वाभिमान को खा जाती है !!
असत्य --------विश्वास को खा जाता है !!
दरिद्रता -------आत्म गौरो को खा जाती है !!
शुक्रवार, जुलाई 09, 2010
गुरुवार, जुलाई 08, 2010
मनुष्य किसे कहते हैं !
मनुष्य
आदर करने पर- चापलूसी समझता है !
उपदेश देने पर- मुहँ घुमा लेता है !
विश्वास करने पर- विश्वासघात करता है !
क्षमा करने पर- कमज़ोर समझता है !
प्यार करने पर- आघात करता है !
सुखी देख कर- इर्ष्या करता है !
दुखी देख कर- प्रसन्न होता है !
आश्रित होने पर- ठोकर मारता है !
स्वार्थ आने पर- तलवे चाटता है !
काम निकल जाने पर- भूल जाता है !
मनुष्य रोते हुए पैदा होता है, निंदा और शिकायते करते हुए जीता है और अंत में निराशा लिए मर जाता है !
इसी को मनुष्य कहते हैं !
इसी को मनुष्य कहते हैं !
इसी को मनुष्य कहते हैं !!!!!!!!!!!!!!!!!!
लेबल:
मनुष्य
शुक्रवार, मई 21, 2010
फ़िरदौस जी ने जिस दीलेरी से स्वयं को "काफ़िर" घोषित किया वह वाक़ई क़ाबिले-तारीफ़ है.
फ़िरदौस जी की हिम्मत की मैं दाद देता हूँ और एक वक़्त था जब सभी धर्म के ठेकेदार और जानकार उनके पीछे पड़े हुए थे और फ़िरदौस जी उनकी एक न सुनी. लोगों को लगा कि वे हिन्दू धर्म में जाने के लिए मन सा बना लिया है और शीघ्र ही वे हिन्दू धर्म स्वीकार कर लेंगी. उन्हें किसी ने हिन्दू धर्म स्वीकार करने का न्योता दे दिया था. लेकिन फ़िरदौस जी, महफूज़ जी और हम जैसे राष्ट्रवादी जानते हैं कि हमारे लिए धर्म कोई मायने नहीं रखता है. हम राष्ट्रवादी किसी भी धर्म में रहें, हम न तो हिन्दू में ही होते हैं न मुस्लिम में; हम सबमें होते हुए भी किसी में भी नहीं होते बल्कि राष्ट्रवादी होते हैं. हम देश-हित को पहले रखते हैं, धर्म को नहीं. हाँ अगर डीपली कहें तो इस्लाम धर्म से थोडा ज़्यादा विमुख और हिन्दू धर्म के थोडा सा करीब होते हैं क्यूंकि हम भारत में रहते हैं और हमें यहाँ उसी हिसाब से चलना पड़ेगा जैसा कि राष्ट्रवाद की विचारधारा हमें बताती है और यही हमारे हित में भी है. हर वह भारतीय राष्ट्रवादी मुस्लिम फ़िर चाहे वह शाहरुख ख़ान हो, आमिर ख़ान हो अथवा सलमान ख़ान और हाँ सैफ़ अली ख़ान (करीना वाला), महफूज़ जी,और हम सब-के-सब राष्ट्रहित में शराब भी पी लेते हैं हमें कोई हर्ज़ नहीं क्यूंकि हमें पता है कि शराब तो मात्र मनोरंजन का साधन है.
तो शीर्षकान्तर न हो, मैं मुद्दे पर आता हूँ आज की पोस्ट में दी गयी टिपण्णी के चित्र में फ़िरदौस जी ने जिस दीलेरी से स्वयं को "काफ़िर" घोषित किया वह वाक़ई क़ाबिले-तारीफ़ है और हम सबको, हम सभी राष्ट्रवादियों को फ़िरदौस जी की इस हिम्मत को दाद देनी चाहिए. मैं पूछता है किसी में इतनी हिम्मत?
क्या आप एक भी ऐसे मुसलमान को जानते हैं जो पहले इस्लाम पर लिखता हो, बल्कि ब्लॉग-जगत के कथित "विश्व के प्रथम एवम एकमात्र इस्लाम धर्म के चिट्ठे" का सक्रिय सदस्य हो और फ़िर कूप-मंदूप्ता से निजात पाई हो, वो एकमात्र ब्लॉगर हैं: हम सबकी चहेती राष्ट्रवादी फ़िरदौस जी!
क्या आप किसी ऐसे मुस्लिम को जानते हैं जो इस्लाम धर्म में घुटन महसूस करता हो और हिन्दू धर्म अपनाने का उसे न्योता मिला हो. वो एकमात्र ब्लॉगर हैं: हम सबकी चहेती राष्ट्रवादी फ़िरदौस जी! लेकिन चुकि राष्ट्रवादी धर्म के ऊपर होते है और राष्ट्रहित से लबरेज़ रहते हैं. इसीलिए उन्होंने हिन्दू धर्म स्वीकार करने से मना कर दिया.
क्या आप किसी ऐसे मुसलमान को जानते हो जो इस्लाम धर्म में रहते हुए स्वयं को "काफ़िर" घोषित कर चुका हो? वो एकमात्र ब्लॉगर हैं: हम सबकी चहेती राष्ट्रवादी फ़िरदौस जी!
काफ़िर का मतलब क्या होता है?
काफ़िर उसे कहते हैं जो ईश्वर के अस्तित्व को सिरे से इनकार कर दे. अंग्रेजी में नॉन-मुस्लिम कहते हैं!
सभी राष्ट्रवादी ब्लॉगर से अनुरोध है कि फ़िरदौस जी के विचारों का साथ दें!
जय हिंद! जय भारत !! जय राष्ट्रवाद !!!
लेबल:
काफ़िर
फ़िरदौस जी ने जिस दीलेरी से स्वयं को "काफ़िर" घोषित किया वह वाक़ई क़ाबिले-तारीफ़ है.
फ़िरदौस जी की हिम्मत की मैं दाद देता हूँ और एक वक़्त था जब सभी धर्म के ठेकेदार और जानकार उनके पीछे पड़े हुए थे और फ़िरदौस जी उनकी एक न सुनी. लोगों को लगा कि वे हिन्दू धर्म में जाने के लिए मन सा बना लिया है और शीघ्र ही वे हिन्दू धर्म स्वीकार कर लेंगी. उन्हें किसी ने हिन्दू धर्म स्वीकार करने का न्योता दे दिया था. लेकिन फ़िरदौस जी, महफूज़ जी और हम जैसे राष्ट्रवादी जानते हैं कि हमारे लिए धर्म कोई मायने नहीं रखता है. हम राष्ट्रवादी किसी भी धर्म में रहें, हम न तो हिन्दू में ही होते हैं न मुस्लिम में; हम सबमें होते हुए भी किसी में भी नहीं होते बल्कि राष्ट्रवादी होते हैं. हम देश-हित को पहले रखते हैं, धर्म को नहीं. हाँ अगर डीपली कहें तो इस्लाम धर्म से थोडा ज़्यादा विमुख और हिन्दू धर्म के थोडा सा करीब होते हैं क्यूंकि हम भारत में रहते हैं और हमें यहाँ उसी हिसाब से चलना पड़ेगा जैसा कि राष्ट्रवाद की विचारधारा हमें बताती है और यही हमारे हित में भी है. हर वह भारतीय राष्ट्रवादी मुस्लिम फ़िर चाहे वह शाहरुख ख़ान हो, आमिर ख़ान हो अथवा सलमान ख़ान और हाँ सैफ़ अली ख़ान (करीना वाला), महफूज़ जी, और हम सब-के-सब राष्ट्रहित में शराब भी पी लेते हैं हमें कोई हर्ज़ नहीं क्यूंकि हमें पता है कि शराब तो मात्र मनोरंजन का साधन है.
तो शीर्षकान्तर न हो, मैं मुद्दे पर आता हूँ आज की पोस्ट में दी गयी टिपण्णी के चित्र में फ़िरदौस जी ने जिस दीलेरी से स्वयं को "काफ़िर" घोषित किया वह वाक़ई क़ाबिले-तारीफ़ है और हम सबको, हम सभी राष्ट्रवादियों को फ़िरदौस जी की इस हिम्मत को दाद देनी चाहिए. मैं पूछता है किसी में इतनी हिम्मत?
क्या आप एक भी ऐसे मुसलमान को जानते हैं जो पहले इस्लाम पर लिखता हो, बल्कि ब्लॉग-जगत के कथित "विश्व के प्रथम एवम एकमात्र इस्लाम धर्म के चिट्ठे" का सक्रिय सदस्य हो और फ़िर कूप-मंदूप्ता से निजात पाई हो, वो एकमात्र ब्लॉगर हैं: हम सबकी चहेती राष्ट्रवादी फ़िरदौस जी!
क्या आप किसी ऐसे मुस्लिम को जानते हैं जो इस्लाम धर्म में घुटन महसूस करता हो और हिन्दू धर्म अपनाने का उसे न्योता मिला हो. वो एकमात्र ब्लॉगर हैं: हम सबकी चहेती राष्ट्रवादी फ़िरदौस जी! लेकिन चुकि राष्ट्रवादी धर्म के ऊपर होते है और राष्ट्रहित से लबरेज़ रहते हैं. इसीलिए उन्होंने हिन्दू धर्म स्वीकार करने से मना कर दिया.
क्या आप किसी ऐसे मुसलमान को जानते हो जो इस्लाम धर्म में रहते हुए स्वयं को "काफ़िर" घोषित कर चुका हो? वो एकमात्र ब्लॉगर हैं: हम सबकी चहेती राष्ट्रवादी फ़िरदौस जी!
काफ़िर का मतलब क्या होता है?
काफ़िर उसे कहते हैं जो ईश्वर के अस्तित्व को सिरे से इनकार कर दे. अंग्रेजी में नॉन-मुस्लिम कहते हैं!
सभी राष्ट्रवादी ब्लॉगर से अनुरोध है कि फ़िरदौस जी के विचारों का साथ दें!
जय हिंद! जय भारत !! जय राष्ट्रवाद !!!
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काफ़िर
मंगलवार, मई 18, 2010
मैं हूँ 'ज़लज़ला', EJAZ AHMAD IDREESI
हद है आप लोगों यह भी न जान पाए कि ये ज़लज़ला कौन है. आपमें तनिक भी बुद्धि नहीं है लगता है आप सबकी बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी है जो इतनी बात समझ न सके. अरे ये भी कौनो सवाल हुआ कि कौन है ज़लज़ला? कहाँ है ज़लज़ला? किधर से आया है ये ज़लज़ला? किधर को जाएगा ये ज़लज़ला? किस ब्लॉगर की उपज है ये ज़लज़ला?
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सच बताऊँ तो हमरा के खुद ही नहीं मालूम है कि कौन है ये ज़लज़ला?
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टाईटिल में मज़ाक किया, उसके लिए सॉरी.
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सच बताऊँ तो हमरा के खुद ही नहीं मालूम है कि कौन है ये ज़लज़ला?
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टाईटिल में मज़ाक किया, उसके लिए सॉरी.
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मैं हूँ 'ज़लज़ला'
सोमवार, मई 17, 2010
कौन है श्रेष्ठ ब्लागरिन ...??? ऑफ़कोर्स बहन फ़िरदौस !!!
पिछले दो दिन से ब्लॉग दुनियां में मिस्टर ज़लज़ला नामक एक जनाब हर जगह एक टिपण्णी कर रहें हैं कि कौन है श्रेष्ठ ब्लॉगरिन ??? और उनकी लिस्ट में ये नाम हैं :::
1-फिरदौस
2- रचना
3 वंदना
4. संगीता पुरी
5.अल्पना वर्मा
6 शैल मंजूषा
इन नाम पर गौर करने पर मुझे इस लिस्ट में केवल एक ही नाम अच्छा लगा जो कि इस ताज की असली हक्दारिणी हो सकती हैं और वो हैं हम सबकी राष्ट्रवादी बहन फ़िरदौस. मैं इस बात को कहने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाता कि जिस तरह से महफूज़ जी राष्ट्रवाद की असल पहचान बने है उसी तरह से फ़िरदौस जी भी एक स्वच्छ मानसिकता की मालकिन है और यह नाचीज़ भी उन्हीं के नक़्शे क़दम पे चलने की कोशिश कर रहा है.
मैं आप सभी से यह अपील करता हूँ कि जिस तरह से सलीम ख़ान v/s फ़िरदौस ख़ान प्रकरण में फ़िरदौस जी का खुले मन से, अत्यधिक टिप्पणियों से साथ दिया था आप इस चुनाव में भी फ़िरदौस जी का साथ दीजिये और आने वाले इस चुनाव में (अगर होंगे) तो सिर्फ़ और सिर्फ़ फ़िरदौस जी का साथ ही दीजिये.
वैसे मुझे पूरा यक़ीन हैं कि हमारे और फ़िरदौस जी जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के निम्न ब्लॉगर्स जो कि इसके पूर्व फ़िरदौस जी के पाले में खड़े दिखाई दिए थे इस बार भी उनका साथ ज़रूर देंगे; ब्लॉगर्स की लिस्ट मै फ़िरदौस जी के ब्लॉग से ही जुटा कर लाया हूँ, जिन्होंने सलीम ख़ान v/s फ़िरदौस ख़ान प्रकरण में खुले मान से फ़िरदौस जी का साथ दिया था:
- संजय बेंगाणी
- जी के अवधिया
- सतीश सक्सेना
- दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
- अनुनाद सिंह
- मौसम
- कहत कबीरा...सुन भई साधो
- तिलक रेलन
- nilesh mathur
- राज भाटिय़ा
- manu
- Shri"helping nature"
- Vijay Kumar Sappatti
- अजित वडनेरकर
- lokendra singh rajput
- HTF
- boletobindas
- मिहिरभोज
- M VERMA
- भारतीय नागरिक - Indian Citizen
- क्रिएटिव मंच-Creative Manch
- बवाल
- कविता रावत
- VICHAAR SHOONYA
- हरकीरत ' हीर'
- Vivek Rastogi
- Ravindra Nath
- Suresh चिपलूनकर
- 'अदा'
- महफूज़ अली
- गिरीश बिल्लोरे
- Ganesh Prasad
- rashmi ravija
- Meenu Khare
- arvind
- SR Bharti
- आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
- निशाचर
- प्रवीण शाह
- पी.सी.गोदियाल
- zeal
- दीपक गर्ग
- विकास
- Amitraghat
- RAJNISH PARIHAR
- "KaushiK"
- संजय भास्कर
- रचना
- Arvind Mishra
- बैरागी
- Tarkeshwar Giri
- Arshad Ali
- Ravish Tiwari
- विवेक सिंह
- राजीव तनेजा
- दीपक 'मशाल'
- जीत भार्गव
- अमित जैन (जोक्पीडिया )
- Shekhar kumawat
- महाशक्ति
- शंकर फुलारा
- Suman
- L.R.Gandhi
- kunwarji's
- HINDU TIGERS
- कृष्ण मुरारी प्रसाद
- गिरिजेश राव
- PARAM ARYA
- Abhishek Chaurey
- Ratan Singh Shekhawat
- योगेन्द्र मौदगिल
- सैयद | Syed
- Sanjeet Tripathi
- अमिताभ श्रीवास्तव
- विजय प्रकाश सिंह
लिस्ट बहुत लम्बी है मैं कॉपी पेस्ट करते करते थक गया हूँ ख़ैर मेरे मर्म और अपील को आप ज़रूर समझ गए होंगे. (ये लिस्ट में जो नाम हैं वे सब तो ज़रूर ही फ़िरदौस जी को वोट देंगे और मैं भी)
इस लिस्ट में नगर आपका नाम है तो समझ लीजिये आपका वोट फ़िरदौस जी को ज़रूर जायेगा. आपका वोट ज़रूर होना चाहिए फ़िरदौस जी के नाम क्यूंकि ऐसा न हुआ तो आप सब गद्दार की श्रेणी में भी आ सकते हैं क्यूंकि आप सबने फ़िरदौस जी को महान ब्लॉगरिन का खिताब इनकी निम्न पोस्ट्स में दे रखा अपनी टिप्पणियों के ज़रिये.
फ़िरदौस जी के लेख जिसमें उक्त ब्लॉगरों ने उन्हें समर्थन में पोस्ट किया था
- क्या मुस्लिम औरतों को इसी तरह 'बेइज्ज़त' होते रहना होगा?
- क्या हमें 'मुसलमान' कहलाने का हक़ है...?
- जात मज़हब एह इश्क़ ना पुछदा, इश्क़ शरा दा वैरी...
- मुस्लिम मर्दों पर क्यों लागू नहीं होता शरीया क़ानून...?
- मज़हब बड़ा या इंसानियत...?
- शरीयत वाले कहां हैं...?
- हमने दो हिन्दू लड़कियों को 'लव जेहाद' से बचाया
- हमारे सवालों से ईमान 'ख़तरे' में पड़ जाता है...
वैसे मुझे सबसे ज़्यादा आश्चर्य इस बात का हो रहा है कि सलीम ख़ान क्यूँ और कैसे फ़िरदौस जी का सपोर्ट कर रहे हैं, यक़ीन नहीं आ रहा न आपको, पहले मुझे भी नहीं आया था. जब मैंने यहाँ एक टिपण्णी पढ़ी आप भी देख लीजिये.
हुआ न आश्चर्य मुझे भी हुआ था. चलिए कोई बात नहीं. आप फ़िर भी फ़िरदौस जी को वोट ज़रूर दीजियेगा. जल्द ही यह नोमिनेशन हो सकता है खुल जाये.
लेबल:
कौन है श्रेष्ठ ब्लागरिन
लेख पोस्ट होने के 10 मिनट के अन्दर 8 Negative वोट ! थू है थू है थू है थू है थू है थू है थू है थू है!
भाई क्या कहूँ बनें चला था ब्लॉगर और सोचा था मैं अपनी कलम चलाऊंगा तो सिर्फ़ और सिर्फ़ सच के लिए, लेकिन क्या करें वर्तमान मीडिया की तरह मुझे भी टी आर पी का रोग लग गया. एक तरफ जहाँ मीडिया टी आर पी के लिए कुछ भी दिखाने के लिए तत्पर दिखाई देती हैं, EZAJ AHMAD IDREESI भी इस भेंड चाल में शामिल हो गए.
आज सुबह जब इस ख़याल से ब्लोगवाणी खोली कि कुछ नया मिलेगा तो हमेशा की तरह "नाम लिया शैतान हाज़िर" वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए सलीम ख़ान से रिलेटेड मुझे ये पोस्ट दिखी.
इस पोस्ट में वही सब कुछ था जो मैंने अपने पिछली पोस्ट को अपने नज़रिए से पेश किया था कि कैसे सलीम ख़ान को ब्लोगवाणी ने सुरेश चिपलूनकर को एक साथ प्रदर्शित किया लेंकिन इसे अबकी पोस्ट किया किसी खातून ने. उन्होंने सलीम ख़ान को मिले नकारात्मक नापंसद के चटकों (-8) के ज़ख्मों पर कुछ मरहम लगाने का काम किया था. मैं उस पोस्ट की वह झलकी पेश कर रहा हूँ जो आपमें ज़रूर उत्सुकता पैदा करेगी.
मुझे ख़ुशी है कि ब्लॉग जगत के साथियों ने मेरी उस अपील पर पूरा पूरा ध्यान दिया और सलीम ख़ान के उस पोस्ट पर जो कि श्रीराम सेना के प्रधान मुथ्लिक के खिलाफ़ लिखी गयी थी, नकारात्मक वोट देने की मेरी अपील पर अमल किया. धन्यवाद नकारात्मक वोट देने वालों भाईयों अथवा बहनों !!! मैं आपसे फ़िर से आग्रह करता हूँ कि सलीम कुछ भी लिखे आप उसके पोस्ट पर आँख मूंद कर नापंसद का चटका लगाईये....
अबकी बार सलीम की पोस्ट पर 10 मिनट में -8 चटका लगा था और क्या मज़ा आयेगा जब मात्र 5 मिनुत में आप लोग (और मैं भी) -16 चटके लगा दें.
तो जवाब दीजिये कौन-कौन मेरे साथ है.
लेबल:
10 मिनट में -8 चटका
